ये कालाधन,भ्रष्टाचार,महंगाई और देश के विकास में सबसे बडी समस्या है। वैसे सरकारी आंकड़ों की मानें तो नोटबंदी के बाद से आयकर दाताओं की संख्या बढी है।
यह कुल आबादी का मात्र 2.5% है। केवल
3 करोड लोगों ने Income Tax Return
File किया है। इसका मतलब ये नही है कि ये सारे आयकर देते है। सही मायनो में देखा
जाये तो मात्र 24 लाख लोग ही ऐसे हैं जिन्होंने अपनी सही आय के आंकडे दिखाये है। जिसमें में से आधे तो सरकारी अफसर हैं। फिर जो लोग सही में व्यवसाय करते है क्या वो अपना सही आयकर चुकाते है बिल्कुल नहीं उल्टा वो ऐसे तरीके निकालते है जिससे आयकर देना ही ना पडे। और हमारे देश में चार्टड अकाउंटेंट भी यही काम करते हैं। इस देश में बेइमानी का ये दौर ब्रिटिर्शस के समय शुरू हुआ और पीढी दर पीढी ये लोगों में बंटती रही। ब्रिटिर्शस ने भारतीय व्यापारियों पर आय का 97% कर लगाया था उन्हैं पता था या तो वे पूरा आयकर देंगे या इसे चुरायेंगे यानि बेइमानी करेंगे। क्योंकि बेइमान व्यक्ति को अपना गुलाम बनाना ज्यादा आसान होता है। तो उन्हौनें व्यवस्था ही ऐसे बनायी जिससे हम उनके आधीन हो। और वहीं पुरानी व्यवस्था आज भी यथावत है अब ऐसा देश कैसे महशक्ति कैसे बनेगा जहाँ लोग पैसा देश से ही कमाते है लेकिन आयकर चुकाते समय ये बहाना मारते है कि पैसा हमने कमाया तो हम आयकर क्यूँ दे लेकिन ये तनिक नही सोचते कि कमाया भी इसी देश से है।अगर देश नही होता तो पैसा कहा से कमाते। अगर अमेरिका या अन्य देशो से भारत की तुलना करें तो कुछ ये स्थिति बनती है।
देश जनसंख्या आयकरदाता
अमेरिका 44 करोड 14 करोड
रूस 15 करोड़ 4 करोड
कनाडा 30 करोड़ 16 करोड
स्वीडन। 10 करोड 7 करोड
भारत। 133 करोड़। 3 करोड़
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क्या आपको लगता हैं भारत में इतने ही आयकर दाता हैं। नहीं आपने आस पास ऐसे लोग ज्यादातर देखे होंगे जिनके पास बहुत गाडिय़ां,आलिशान घर देखे होंगे।
ये वही लोग है जो आपकी नजरों में तो अमीर है लेकिन सरकारी आकंडों में नही।क्योंकि भारत में सही आय दिखाने वाले मात्र 24 लाख लोग ही अपनी सही आय का व्योरा देते है और उसमें भी आधे से ज्यादा तो सरकारी अफसर है।अगर देश को बदलना है तो लोगो को अपनी नियत को और सरकार को पुराने नियम को बदलना होगा।
सोच बदलो देश बदलो
नीचें कमेंट्स में अपनी राय जरूर दें।
जय हिन्द
धन्यवाद

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